How make career in acting #2 | How to make a career in film

How make career in acting

How make career in acting #2 | एक्टिंग: हीरो बनने का जुनून पार्ट -2

 

एक्टिंग से जुड़े विभिन्न काम

एक्टिंग का क्षेत्र काफी विस्तृत है। एक फिल्म या टीवी सीरियल में मुख्य पात्रों के अलावा भी अनेक पात्र होते हैं। उनके बिना फिल्म पूरी नहीं हो सकती है। आप मुख्य पात्र को छोड़कर भी अभिनय के लिए तैयार कर सकते है। इनके अलावा नाटक, रेडियो, विज्ञापन आदि में भी अनेक तरह के काम मौजूद होते हैं। जिन्हें आप कर सकते हैं।

एक्टिंग के प्रति समर्पण

यदि आप ग्लैमर की दुनिया में आना चाहते हैं तो सबसे पहले यह बात होनी चाहिए कि आपकी इस क्षेत्र में भरपूर रूचि हो। छोटा-सा रोल भी मिलने पर उसे बड़े प्यार और मेहनत से करने की इच्छ होनी चाहिए। रूचि न होने पर आप छोटे-मोटे रोल से लगाव नहीं होगा। तब काम की तलाश करते रह जायेंगे, आपको काम नहीं मिलेगा। एक्टिंग के प्रति समर्पित होना भी जरूरी है। यदि आप काम मिल जायेगा कर लेंगे। नहीं मिलेगा तो दूसरा काम कर लेंगे। ऐसी बातों को सोचते रहेंगे तो ऐसे में आपको काम नहीं मिलेगा।

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शारीरिक क्रियाएं

आप एक्टिंग करना चाहते हैं तो आपकी शरीर और मन की क्रियाओं में संतुलन होना जरूरी है। आपकी चाल ढाल, रहन-सहन, बोलचाल, उठना-बैठना, किसी चीज़ को उठाना, फेंकना जैसी दैनिक क्रियाओं में अलग तरह का प्रभाव होना चाहिए। जब आप चले तो लगे कि आप एक एक्टर है। आपके अंदर एक अलग तरह का पाॅवर है। आपके पूरे बाॅडी में जबर्दस्त आकर्षण होना चाहिए।

जब आपके शरीर के अन्दर इस तरह का प्रभाव होगा तब जाकर आप किसी भी तरह की एक्टिंग कर पाएंगे। क्योंकि एक एक्टर को हंसने, रोने, चिखने, चिल्लाने, प्यार करने, मारपीट करने, गुस्सा होने, मनाने, दुखी होने, गमगीन होने, सदमा लगे जैसी सभी तरह के भाव उत्पन्न करने पड़ते है। यदि आप किसी तरह के भाव उत्पन्न कर सकते है तो एक अच्छे एक्टर के रूप में पहचाने जा सकते हैं। एक अच्छे एक्टर के अंदर शारीरिक क्रियाओं उत्पन्न करने और उस पर कंट्रोल करने की क्षमता होती है। यदि आप ऐसा कर पाते हैं तो अच्छा एक्टर बन सकते हैं।

बहुत कुछ कहती है आंखें

एक एक्टर की आंखें सब कुछ कह देती हैं। आंखों के भाव से सब कुछ कह देने वाला एक सम्पूर्ण एक्टर कहलाता है। आंखों पर अनेक मुहावरे बने है। उनसे आप अंदाजा लगा सकते है कि आंखों के द्वारा कितना कुछ कहा जा सकता है। यहां आंखें छोटी बड़ी या मोटी होने की बात नहीं कही जा रही है। यहां आंखो की भाषा की बात की जा रही है। एक्टिंग में आंखों की भाषा को बोलने आना जरूरी है।

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चेहरे का एक्सप्रेशन

आंखों के साथ चेहरे पर भाव आना जरूरी है। यदि आप दुखी होने वाला सीन कर रहे है तो आपके चेहरे पर दुख के भाव होना जरूरी है। आपके चेहरे का इतना दुखी होना चाहिएकि दर्शकों के अंदर भी दुख उत्पन्न कर जायें। तब जाकर आपके एक्टिंग के प्रभाव को परफैक्ट माना जायेगा।

बाॅडी मूवमेंट

करैक्टर के अनुसार आपके बाॅडी का मूवमेंट होना जरूरी है। आप किसी टपोरी या डाॅन का रोल कर रहे है। दोनों में बाॅडी मूवमेंट में काफी अंतर होगा। दोनों के उठने बैठने, चलने फिरने, बातचीत करने का अंदाज, बिलकुल अलग होगा। यदि आप डाॅन बनकर टपोरी जैसे ढ़ीले ढ़ाले स्टाइल में फेकेगें तो डाॅन का करैक्टर उभर कर नहीं आयेगा। डाॅन के करैक्टर में गंभीरता, चपलता, साहस का होना जरूरी है। जब तक यह सारी बातें नहीं आयेगी तो दर्शकांे को मजा नहीं आयेगा। करैक्टर के असली स्टाइल का प्रभाव आपको यदि दर्शाना है तो आपको बाॅडी मूवमंेट के द्वारा इसे प्रस्तुत करना होगा।

बाॅडी लैंग्वेज

एक्टिंग में बाॅडी लैंग्वेज का बहुत महत्व है। यदि आप बाॅडी लैंग्वेज के बारे में अच्छी जानकारी नहीं रखते हैं तो आप अच्छा अभिनय नहीं कर पाएंगे। गूंगे व्यक्ति का रोलकर रहे है तो ऐसा लगना चाहिए कि आप सचमुच के गूंगे है। यह सब कमाल बाॅडी लैंग्वेज की जानकारी होने पर ही कर पाएंगे।

डायलाॅग डिलेवरी

एक्टिंग डायलाॅग डिलेवरी का बहुत प्रभाव है। अच्छी एक्टिंग आप कर लेते है लेनिक आपकी डायलाॅग डिलेवरी अच्छी नहीं है तो आपको कोई पसंद नहीं करेगा। वहीं सूरत भले ही न अच्छी हो पर यदि आपकी डायलाॅग डिलेवरी अच्छी है तो आप अपना प्रभाव जमा सकते हैं।

ऐसे अनेक कलाकार है जिन्होंने अपनी आवाज़ की बदौलत एक अलग पहचान बनायी। ओमपुरी, कादर खान आदि की सूरत नहीं है फिर भी इन्हांेन फिल्मों में अपना प्रभाव जमा कर रखा। इसकी वज़ह है उनकी आवाज़। जिसकी वज़ह से इन्हें पसंद किया जाता है। आपके बोलने का अंदाज में कुछ इसी तरह होना चाहिए की दिल को छू जाएं। इसके लिए आवाज़, शुद्ध, स्पष्ट और दमदार होना चाहिए।

जिसे दूसरा आसानी से समझ सकें और कानों में अच्छा भी लगे। इसके लिए बोलते समय सांसो के चढ़ाव व होंठों के कंपन पर कमांड होनी चाहिए, जो आवाज़ को साफ, सही और स्पष्ट बनाती है।

स्मरण शक्ति (मेमोरी)

एक एक्टर की स्मरण शक्ति भी काफी अच्छी होनी चाहिए। आपकी स्मरण शक्ति जितनी पाॅवर फुल होगी वह आपके लिए उतनी ही अचछी होगी। किसी भी सीन को करने के लिए कभी-कभी लंबे-लंबे डायलाॅग दिए जाते है। उन्हें तुरंत याद करके बोलना होता है यदि आपकी स्मरण शक्ति अच्छी नहीं है तो आप लंबे-लंबे डायलाॅग नहीं बोल सकेंगे।

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नृत्य (डांस)

भारतीय फिल्मों में हीरो-हीरोइन को एक्टिंग के साथ अच्छा डांस भी आना जरूरी है। यदि आप अचछा डांस नहीं कर सकते हैं। तो आप फिल्मों में अपना प्रभाव नहीं जमा सकते है। एक्टर के लिए भारतीय और वेस्टर्न दोनों ही प्रकार के डांस में बराबर कमांड होना चाहिए। हिन्दी फिल्मों में जितने भी मेन एक्टर हैं वे अपने डांस की वजह से पब्लिक में फेमस है यदि आपको डांस नहीं आता है तो डांस आपको सीखना पड़ेगा।

आत्मविश्वास (कांफिडेंश)

बिना कांफिडेंश के आप एक अच्छा एक्टर नहीं बन सकते है। अच्छा एक्टर बनने के लिए अपने अंदर कांफिडेंश पैदा कीजिए। एक एक्टर को हर तरह के रोल करना पड़ता है। शुरूआती दौर में हर तरह के हालातों से गुजरना पड़ता है। फिल्म रिलिज होने पर फ्लाप का झटका भी सहना पड़ता है। ऐसे में यदि आप अपना कांफिडेंश खो देंगे तो आगे नहीं बढ़ पायेंगे। हर तरह की समस्याओं से जुझते हुए अपने अंदर कांफिडेंश बनाये रखने वाला ही सुपर स्टार बन सकता है।

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